Thursday, June 1, 2017

पंचायत से

पंचों,
सोनम गुप्ता फिर से बेवफा हो गईǃ
कल शाम को लोगों के झगड़ा झंझट फरियाने से थोड़ा टाइम मिला तो साेचे कि सड़क पर टहल लें लेकिन जइसे ही गांव से थोड़ा बहरे निकले तो बुझावन मिल गये। अब कहां का टहलना। बुझावन  की बुझौनी तो बूझनी ही पड़ेगी।
नजर पड़ते ही बुझावन ने गोला दाग दिया–
"का सरपंच बाबू,इ सोनम गुप्ता फिर से बेवफा हो गई का?"
हम जान बचाने की फिकर में थे सो बोले– "अरे का बुझावन,इ सब का बे सिर पैर की बात में पड़ते हो। हम तुम्हारी उल्टी बानी का मतलब नहीं समझते। कुछ दिन पहले भी ऐसा हल्ला मचा था और आज फिर तुम्हारे मुंह से सुनाई पड़ रहा है। किसी की भी औरत के बारे में बिना जाने–बूझे ऐसी–वैसी बात मुंह से नहीं निकालनी चाहिए।"
"नहीं सरपंच बाबू तुम खूब समझते हो। लेकिन आज तो हम भी फाइनले करके रहेंगे। लुगाई तुम्हारी हो या हमारी। ऐसी हरकत तो बर्दास से बाहर है। ऐसी लुगाई को तो तीन तलाक दे देना चाहिए। कुछ दिन पहिले भी इ खबर आई थी तो हम समझे थे कि लड़के सब हंसी मजाक कर रहे हैं लेकिन इस औरत ने पता नहीं अइसा क्या जादू कर दिया था कि पब्लिक सुसरी एक–एक रूपये को तरस गयी। बैंक से लेकर घर तक लाइन लग गई। लोगों को पइसे के लिए बैंक में जान गंवानी पड़ गई। शादी बियाह भी लोगों का एक्के रूपये में होने लगा। औरतों की जनम भर की कमाई मर्दों को पता चल गयी। हमको भी एक दिन बैंक का मैनेजर पइसा नहीं दे रहा था तो हम भी उससे लड़ गये। उ तो पुलिस वाले हमको पकड़ लिए नहीं तो लाठी से मार के उसका कपार फोर दिये होते भले ही तीन सौ दू का मुजरिम बन जाते। अउर आज फिर से यही सब सुनाई दे रहा है। तुम तो राजनीत वाले आदमी हो। तुम्हारा तो कामे पब्लिक को लड़ा–भिड़ा कर वोट बटोरना है। तुमको तो इ सब ठीके लगेगा।"
हमने धीरे–धीरे समझने की कोशिश की कि आखिर में हुआ का है और फिर उसे समझाने की कोशिश भी की। दरअसल किसी नवछ्टिुए लड़के ने बुझावन को यह कहकर चिढ़ा दिया था कि सोनम गुप्ता फिर से बेवफा हो गयी है। पिछली बार नोट छापने वाली मशीन उसके कब्जे में थी और इस बार वोट डालने वाली मशीन उसके कब्जे में है। अब सारा का सारा वोट एक्के पार्टी को चला जायेगा। उस बार तो राम की दया से जान बची लेकिन इस बार तो देस रसातले को चला जायेगा। बुझावन के लिए इतना काफी था। वह बहुत परेशान था कि अब ऐसी बेवफा औरत ना जाने वोट वाली मशीनों के साथ क्या करेगी। जिस देस में अच्छे–अच्छों को बईमान बनते देर नहीं लगती वहां बेवफा औरत की कौन कहे?
बुझावन का भाषण जारी था–
"सरपंच बाबू, इ सब तुम्हारे जैसे नेता–नपोड़ियों का ही काम है। पब्लिक को कभी नोट के लिए परेसान करते हो कभी वोट के लिए। बन्दूक रखते हो सोनम गुप्ता के कन्धे पर। अरे इ पब्लिक बुरबक है नहीं तुम्हीं लोगों को सोनम गुप्ता बना देती। अरे इ सोनम गुप्ता तुम लोगों की राजनीत है राजनीत अउर कुछ नहीं.........
पंचों,मुझे लगा कि बुझावन का पारा मई की गर्मी की तरह ही चढ़ता जा रहा है। कहीं ज्यादा चढ़ गया तो ससुर मल्लयुद्ध पर भी उतारू हो जायेगा। और भाई राजनीति तो झगड़ा करके होती नहीं सो हमने भी सरकने में ही भलाई समझी। अभी कोई चुनाव तो है नहीं तो क्यों टेंशन लिया जाय। रही बात सोनम गुप्ता के बेवफा होने की तो वह तो अंग्रेजों के जमाने से ही होती आ रही है और आगे भी होती रहेगी। हां,पहले उतना हल्ला गुल्ला नहीं होता था लेकिन अब जमाना दूसरा है। अब औरतों का छ्पिा कर रखा गया रूपया–पइसा छ्पिता नहीं तो अउर का छ्पिेगा।
तो राम राम पंचों।

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