Wednesday, November 22, 2017

माता ने बुलाया हैǃ

माता ने बुलाया हैǃ
कहते हैं कि माता वैष्णो के यहाँ से बुलावा आता है,तभी आदमी वहाँ तक पहुँच पाता है। वैसे तो मन में आता है कि साल में कम से कम एक बार जरूर माता के दरबार में हाजिरी लगा लूँ लेकिन माता बुलाये तब तो। 2014 के जून महीने में माता के दरबार तक एक बार पहुँचा था लेकिन 2015 खाली–खाली ही बीत गया और माँ ने बुलावा नहीं भेजा। 2016 भी बीत गया और लगने लगा कि माँ कुछ नाराज है लेकिन 2017 में माँ ने बुलावा आखिर भेज ही दिया। समय का बहुत ही अभाव था लेकिन सितम्बर महीने के पहले सप्ताह में संयोग बन गया।

चल अकेलाǃ
यात्रा वैसे तो मैं अकेले करना पसन्द करता हूँ। हर तरह की आजादी रहती है। जहाँ मन करे वहाँ घूमो। जहाँ मन करे वहाँ रूको। जो मन करे वो खाओ। लेकिन बेतकल्लुफ दोस्त साथ हों तो यात्रा का मजा कई गुना बढ़ जाता है। और दोस्त भी ऐसे जो हर साल वैष्णो माता का जयकारा लगाते हुए माँ के दरवाजे पर मत्था टेकते हैं।