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Friday, January 25, 2019

पिथौरागढ़

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12 नवम्बर
5 बजे ही सोकर उठ गया। आज मुझे पिथौरागढ़ के लिए निकलना था। कल दिन भर की गयी खलिया टॉप और थमरी कुण्ड की ट्रेकिंग जेहन में बिल्कुल ताजा थी। कल रात में ही होटल संचालक से गाड़ियों के बारे में बात की थी। उसने अपने कई परिचितों से बात की तो पता चला कि सारी गाड़ियाँ हल्द्वानी के लिए बुक हैं। एक और विकल्प था। पता चला कि थल से जिस गाड़ी से मैं आया था वह भी सुबह में ही निकलती है। जल्दी–जल्दी नित्यकर्म से निवृत हुआ। नहाने की कोई आवश्यकता ही नहीं थी।

Friday, January 18, 2019

थमरी कुण्ड

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खलिया टॉप ट्रेक से वापस आकर जब मैं मुख्य सड़क पर पहुँचा तो चाय की तलब लगी थी। पास ही में सड़क किनारे एक छोटा सा रेस्टोरेण्ट है। नाम है–इग्लू। यह बिल्कुल इग्लू के आकार में ही बना है। चाय पीने में 1 बज गया। अब मेरा अगल लक्ष्‍य था थमरी कुण्ड ट्रेक। मैंने ट्रेक के बारे में पूछताछ की। इस ट्रेक की जड़ तक पहुँचने के लिए मुख्य सड़क पर ही 2 किमी चलना था। सो चला। ये सीधी सड़क भी चढ़ती–उतरती हुई चलती है। शरीर की सारी ऊर्जा सोखती हुई। अभीष्ट जगह पर जब पहुँचा तो वहाँ रास्ता बताने के लिए कोई प्राणिमात्र मौजूद नहीं था।

Friday, January 11, 2019

खलिया टॉप

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कुछ देर में बारिश कुछ हल्की हो गयी। बादल भी छँटने शुरू हो गये थे। हिमालय की चोटियों के होने का कुछ–कुछ एहसास होना शुरू हो गया था। ये भी एहसास हो रहा था कि अगर बादल नहीं होते तो नजारा कैसा होताǃ
मंदिर परिसर में एक–दो चक्कर लगाने के बाद 5 बजे मैं वापस लौट पड़ा। वो चारों सतयुगी बन्दे भी मंदिर छोड़कर बाहर निकल चुके थे लेकिन मैं उनसे दूरी बनाए हुए था।

Friday, January 4, 2019

मुन्स्यारी की ओर

कुमाऊँ कैलाश–मानसरोवर का प्रवेश द्वार है। अनादि काल से ही,भगवान शिव के निवास स्थान तक की यात्रा के लिए,कुमाऊँ मार्ग प्रदान करता रहा है। अब भोलेनाथ ने अपने घर तक,मुझे कभी नहीं बुलाया तो मैंने मार्ग को ही मंजिल बना दिया। और निकल पड़ा कुमाऊँ की खूबसूरत वादियों की ओर। कैलाश नहीं तो कुमाऊँ ही सही।
काठगोदाम कुमाऊँ का प्रवेश द्वार है। ट्रेन से कुमाऊँ आने के लिए काठगोदाम आना ही पड़ता है।