2. शरद ऋतु (15 सितंबर से 15 दिसंबर)– इस ऋतु का प्रभाव सितंबर के मध्य से दिखना शुरू हो जाता है। इस समय दक्षिणी–पश्चिमी मानसून उत्तरी भारत से लौटना शुरू कर देता है।
वायुदाब– सितंबर के अन्त तक सूर्य कर्क रेखा से लौटकर विषुवत् रेखा पर पहुँच जाता है। इसी के साथ कम वायुदाब का क्षेत्र भी अपना स्थान बदलने लगता है। अक्टूबर में यह बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ता है। इसके बढ़ने की गति का मानसूनी हवाएँ अनुसरण करती हैं। ऐसी अवस्था में मानसून लौटने लग जाता है। वैसे मानसूनी हवाएँ उतनी शीघ्रता से नहीं लौटती जितनी तेजी से वे आती हैं। पहले तो वर्षा की मात्रा कम होने लगती है,सितंबर के अन्त तक तो उत्तरी मैदानी भाग में वर्षा प्रायः बन्द ही हो जाती है।

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