Wednesday, March 29, 2017

वाराणसी दर्शन–सारनाथ


धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी वाराणसी से लगभग 9 किमी दूर उत्तर–पूर्व में स्थित सारनाथ भगवान बुद्ध के जीवन से सम्बन्धित चार प्रमुख स्थानों– कपिलवस्तु, बोधगया, सारनाथ तथा कुशीनगर में से एक है। कपिलवस्तु में उनका जन्म हुआ, बोधगया में उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ, सारनाथ में उन्होंने अपने शिष्यों को पहला उपदेश प्रदान किया जिसे धर्मचक्रप्रवर्तन कहा जाता है तथा कुशीनगर में उन्हें निर्वाण प्राप्त हुआ।
सारनाथ से ही बौद्ध धर्म के प्रचार–प्रसार का आरम्भ माना जाता है। सारनाथ में बुद्ध ने अपना पहला उपदेश 533 ई0 पूर्व में दिया था और उसके बाद से कई सौ सालों तक सारनाथ के इतिहास के बारे में कुछ विशेष पता नहीं चलता है। पुनः मौर्य सम्राट अशोक के काल में विभिन्न स्तूपों एवं बौद्ध मठों का निर्माण हुआ जिसकी वजह से आज का सारनाथ प्रसिद्ध है और जिसे देखने तमाम देशी और विदेशी पर्यटक यहां खिंचे चले आते हैं। अशोक के उत्तराधिकारियों के काल में सारनाथ का महत्व कम हो गया। वैसे सारनाथ के इतिहास में गुप्तकाल सबसे गौरवपूर्ण समय रहा। इसके बाद के काल में न जाने कितनी बार सारनाथ का उत्थान और पतन हुआ होगा लेकिन मेरे लिए सारनाथ का इतना ही इतिहास–ज्ञान काफी था और एक दिन अचानक ही बिना किसी पूर्व निर्णय के मैं वाराणसी जा धमका और वहां से सारनाथ।

Tuesday, March 21, 2017

कोणार्क और चन्द्रभागा

इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें–

चौथा दिन–
आज हमारा पुरी में चौथा और अन्तिम दिन था। आज हम कोणार्क जा रहे थे। कोणार्क पुरी जिले में ही पड़ता है। कोणार्क जाने के लिए पुरी से पर्याप्त विकल्प उपलब्ध हैं। गुण्डीचा मन्दिर के पास स्थित बस स्टैण्ड से कोणार्क जाने के लिए आसानी से बसें मिल जाती हैं जिनका किराया 30 रूपये है। पैकेज के रूप में कोणार्क का टूर प्राइवेट बस आपरेटरों द्वारा भुवनेश्वर के साथ ही कराया जाता है जिसमें काफी भागमभाग व जल्दबाजी होती है। छोटे रिजर्व साधन के रूप में 3 से 4 सीट वाला आटो रिक्शा आसानी से उपलब्ध हैं। बिना मोलभाव वाला किराया है 700 रूपया जिसमें कुछ न कुछ गुंजाइश रहती ही है। पुरी से कोणार्क की दूरी 35 किमी है जिसे बस से तय करने में एक घण्टे से भी कम का समय लगता है।

Monday, March 13, 2017

चिल्का झील

इस यात्रा के बारे शुरू से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें–

तीसरा दिन–
आज पुरी में हमारा तीसरा दिन था। आज हमने चिल्का झील जाने का प्लान बनाया था। चिल्का झील जाने के लिए पुरी से बस आपरेटर सप्ताह में तीन दिन– सोमवार,बुधवार और शुक्रवार को टूर आयोजित करते हैं। इसमें प्रति सीट किराया 220 रूपये है। बस के अतिरिक्त आटो या चारपहिया गाड़ी भी चिल्का झील के लिए बुक की जा सकती है परन्तु इनका किराया बहुत महंगा है। बस वाला विकल्प सर्वोत्तम है। अतः हमने बस में दो सीटें एक दिन पहले ही बुक कर ली थीं। चिल्का झील के लिए पर्यटकों की भीड़ भी सम्भवतः कम ही होती है क्योंकि जिस बस में हम बैठे थे वह एक तिहाई से ज्यादा खाली थी।
सुबह के 6.30 बजे हम चक्रतीर्थ रोड स्थित स्टैण्ड पर पहुंच गये परन्तु बस चली 7.30 बजे। इस टूर प्लान में झील के अतिरिक्त एक मन्दिर अलारनाथ का दर्शन भी शामिल था। पुरी से चिल्का झील के किनारे स्थित सतपदा नामक स्थान लगभग 50 किमी है जहां हमें पहुंचना था। लेकिन हमारा पहला पड़ाव अलारनाथ मन्दिर था जो पुरी से 20 किमी दूर है। वैसे तो इस तरह के टूर में जबरदस्ती एक मन्दिर को घुसाना कुछ जमता नहीं लेकिन लेकिन मर्जी बस वालों की। चिल्का झील पहुंचने के लिए इसके अलावा और कोई दूसरा आसान विकल्प उपलब्ध नहीं है।

Wednesday, March 8, 2017

भुवनेश्वर

इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें–

दूसरा दिन–
आज पुरी में हमारा दूसरा दिन था और आज हम भुवनेश्वर जाने वाले थे। जैसा कि मैं पिछले भाग में भी उल्लेख कर चुका हूं कि भले ही यह जनवरी का अन्तिम सप्ताह था लेकिन पुरी में ठंड का कोई असर नहीं था। हां,कही–कहीं कुहरा दिख रहा था। पुरी से भुवनेश्वर की दूरी लगभग 65 किमी है। पुरी से भुवनेश्वर जाने के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। पुरी का जगन्नाथ मन्दिर,कोणार्क जाने वाले जिस मुख्य सड़क मार्ग के किनारे स्थित है उसी सड़क मार्ग के किनारे,मन्दिर से लगभग 2.5 किमी दूर,गुण्डीचा मन्दिर के पास बस स्टैण्ड भी स्थित है जिसका आटो रिक्शा वाले मन्दिर के पास से 10 रूपया किराया लेते हैं। अगर मन्दिर के आस–पास आप ठहरे हैं तो आसानी से दस रूपये देकर इस बस स्टैण्ड तक पहुंच सकते हैं और कहीं और ठहरे हैं तो कुछ अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे। इसे वैसे तो कोणार्क बस स्टैण्ड के नाम से ही जाना जाता है लेकिन से भुवनेश्वर जाने के लिए भी बसें यहां से मिल जाती है। वैसे भुवनेश्वर जाने के लिए एक दूसरा बस स्टैण्ड भी है।