Sunday, March 31, 2019

घुमक्कड़ी ज़िंदाबाद


Friday, March 15, 2019

विश्व विरासत शहर–अहमदाबाद (दूसरा भाग)

इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें–

भद्र किले से 10 मिनट से कुछ कम की ही पैदल दूरी पर सीदी सैयद मस्जिद बनी हुई है। मैं रास्ता पूछता हुआ वहाँ पहुँच गया। सीदी सैयद की मस्जिद में बनी जालियां काफी प्रसिद्ध हैं। सीदी सैयद की मस्जिद एक छोटी सी इमारत है। लेकिन इसके खम्भे और इसकी दीवारों में बनी जालियाँ सर्वाधिक दर्शनीय हैं। मैं जब यहाँ पहुँचा तो इन जालियों का कद्रदान कोई नहीं था। एक मौलवी साहब मस्जिद में सफाई कर रहे थे।
सीदी सैयद की मस्जिद का निर्माण 1572 में सीदी सैयद नामक एक अबीसिनियन (वर्तमान इथियोपिया) मूल के एक व्यक्ति द्वारा कराया गया था।

Friday, March 8, 2019

विश्व विरासत शहर–अहमदाबाद (पहला भाग)

इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें–


अहमदाबाद या फिर पूरे गुजरात का इतिहास सामान्यतः 10वीं सदी के पूर्वार्द्ध तक कन्नौज के गुर्जर प्रतिहार शासकों से जुड़ा हुआ रहा है। 10वीं सदी में राष्ट्रकूट शासक इन्द्र तृतीय ने गुर्जर प्रतिहार शासक महिपाल को पराजित कर दिया। केन्द्रीय शासन कमजोर पड़ गया और इस समय गुजरात क्षेत्र अराजकता का शिकार हो गया। ऐसी परिस्थितियों में गुजरात में मूलराज प्रथम (941-995 ई.) ने चालुक्य वंश की गुजरात शाखा की स्थापना की। उसने तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए सरस्वती घाटी में एक राज्य की स्थापना की।

Friday, March 1, 2019

लोथल–खण्डहर गवाह हैंǃ

इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें–

नलसरोवर के चौराहे पर भटकते हुए पता चला कि लोथल जाने के लिए मुझे सबसे पहले बगोदरा जाना पड़ेगा और बगोदरा जाने के लिए कोई गाड़ी नहीं थी। किसी ने कहा कि छकड़े जाते हैं। नलसरोवर आने के बाद मैं सुबह से ही छकड़ों को देख रहा था लेकिन अब समय था तो एक छकड़े के पास जाकर खड़ा हो गया। ऐसी जुगाड़ वाली गाड़ियों को देखा तो बहुत है लेकिन "छकड़ा" नाम पहली बार सुन रहा था। बुलेट या फिर राजदूत बाइक के इंजन को रूपान्तरित कर,भारत में बहुतायत से उपयोग में लायी जाने वाली "जुगाड़ तकनीक" के प्रयाेग से,सामान ढोने की गाड़ी के रूप में बदल दिया गया था। अब इस गाड़ी पर सामान ढोइये या आदमी– क्या फर्क पड़ता है।