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नलसरोवर के चौराहे पर भटकते हुए पता चला कि लोथल जाने के लिए मुझे सबसे पहले बगोदरा जाना पड़ेगा और बगोदरा जाने के लिए कोई गाड़ी नहीं थी। किसी ने कहा कि छकड़े जाते हैं। नलसरोवर आने के बाद मैं सुबह से ही छकड़ों को देख रहा था लेकिन अब समय था तो एक छकड़े के पास जाकर खड़ा हो गया। ऐसी जुगाड़ वाली गाड़ियों को देखा तो बहुत है लेकिन "छकड़ा" नाम पहली बार सुन रहा था। बुलेट या फिर राजदूत बाइक के इंजन को रूपान्तरित कर,भारत में बहुतायत से उपयोग में लायी जाने वाली "जुगाड़ तकनीक" के प्रयाेग से,सामान ढोने की गाड़ी के रूप में बदल दिया गया था। अब इस गाड़ी पर सामान ढोइये या आदमी– क्या फर्क पड़ता है।
