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Friday, August 25, 2017
Friday, May 26, 2017
दार्जिलिंग–वज्रपात का शहर
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16 अप्रैल–
16 अप्रैल–
दार्जिलिंग–
या वज्रपात का शहर।
लघु हिमालय में स्थित इस पहाड़ी क्षेत्र को अंग्रेजों ने एक हिल स्टेशन के रूप में स्थापित किया। यह स्थान उनके लिए शारीरिक सुख के लिहाज से अनुकूल था। साथ ही सिक्किम की ओर जाने वाले मार्ग में पड़ने वाला दार्जिलिंग सामरिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण था। इसी वजह से भारत के अन्य हिल स्टेशनों की तरह ही अंग्रेजों ने इसकी खोज की और इसे विकसित किया। ब्रिटिश ढाँचे में बनी इमारतें इसकी गवाह हैं। इन इमारतों के अलावा कुछ स्थानों केे नाम भी अंग्रेजों के प्रभाव को बखूबी बयां करते हैं। दार्जिलिंग से कलिम्पोंग की यात्रा में कुछ स्थानों के नाम हमें इस तरह मिले जैसे– सिक्स्थ माइल,टेन्थ माइल,इलेवेन्थ माइल (6th mile, 10th mile, 11th mile) जिनका मतलब हम समझ नहीं सके।
Friday, May 19, 2017
कलिम्पोंग
आज हम दार्जिलिंग से कलिम्पोंग जा रहे थे। जल्दी सो कर उठे और गरम पानी के लिए होटल के काउण्टर पर कई बार दौड़ लगाई फिर भी सात बजे पानी मिला। उनकी भी अपनी मजबूरी थी। हर कमरे तक गर्म पानी पहुँचाना था तो उन्होंने भी अपना रूटीन बना रखा था। किसको पहले पानी देना है किसको बाद में। हमने भी मूर्खता का दामन पकड़ रख था। जब गर्म पानी की इतनी ही किल्लत थी तो नहाने की क्या आवश्यकताǃ हमें शहर से कहीं दूर जाना था तो फिर गर्म पानी और नहाने के नाम विलम्ब करना कतई उचित नहीं था। फिर भी गलती तो हो गयी थी।
Friday, May 12, 2017
दार्जिलिंग हिमालयन रेल का सफर
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आज हमारे लिए ऐतिहासिक दिन था क्योंकि हम दार्जिलिंग हिमालयन रेल या ट्वाय ट्रेन का सफर करने वाले थे जिसके लिए हमने लगभग 15 दिन पूर्व ही टिकट बुक कर रखा था। चूँकि हमारी ट्रेन का टाइम 9.40 पर था अतः उसके पहले हमने दार्जिलिंग के कुछ लोकल साइटसीन का प्लान बनाया जिसके लिए हमने कल बुकिंग की थी। इसके अनुसार आज सुबह का प्लान था– 3 प्वाइंट टूर। इसमें सम्मिलित थे– टाइगर हिल पर सूर्योदय,बतासिया लूप तथा घूम मोनेस्ट्री। टाइगर हिल पर सूर्योदय देखने के लिए आवश्यक था कि वहाँ लगभग 5 बजे तक पहुँच जाया जाय।
Friday, May 5, 2017
मिरिक–प्रकृति की गोद में
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कल शाम तक हम दार्जिलिंग पहुँच चुके थे और दार्जिलिंग से साक्षात्कार हो चुका था। थके थे इसलिए जल्दी सो गये। दार्जिलिंग की सड़कों पर घूमने के बारे में नहीं सोच सके। इसलिए आज सीधे दार्जिलिंग से बाहर मिरिक की ओर निकल पड़े। यहाँ रूककर प्लान बनायेंगे तो बहुत समय नष्ट होगा। मिरिक घूमने के लिए किसी विशेष प्लानिंग की जरूरत नहीं है। मिरिक जाने के लिए चौक बाजार बस स्टैण्ड जाना पड़ता है। या यूँ कहें कि चौक बाजार बस स्टैण्ड ही दार्जिलिंग से बाहर निकलने के लिए मुख्य द्वार है।
Friday, April 28, 2017
न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग की ओर
दोपहर के 12.25 बजे ट्रेन से उतरने के बाद हम न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन से बाहर निकले। पसीने से भीगे कपड़ाें से लदा और रात भर की अनिद्रा व भागदौड़ से परेशान शरीर,परमतत्व की प्राप्ति जैसा अनुभव कर रहा था। बाहर रिक्शों और टैक्सियों की लाइन लगी थी। मानो हमसे यह पूछा जाने वाला था कि किस लोक में जाना है। पूछने की जरूरत ही नहीं थी। धड़ाधड़ ऑफर मिल रहे थे। हमारे चेहरे से ही जाहिर था कि हम किसी दूसरी दुनिया से आये हुए एलियन हैं। एक टैक्सी वाले ने अपना किराया बताया तो पांव तले की जमीन खिसक गई।
Friday, April 21, 2017
बक्सर से न्यू जलपाईगुड़ी की रेल यात्रा
अप्रैल के प्रारम्भ से ही लू व गर्मी की शुरूआत लगभग हो ही जाती है और इस समय पहाड़ी इलाकों का मौसम बहुत ही सुहावना हो जाता है। भारत के बहुत सारे हिल स्टेशनों में से दार्जिलिंग भी एक है। मैंने भी दार्जिलिंग की खूबसूरती के किस्से सुन रखे थे तो अपना भी मन चल पड़ा एक दिन दार्जिलिंग की सैर पर। इस सफर में संगीता भी साथ थी। इस वजह से इस बात का भी डर नहीं था कि बंगाल की जादूगरनी औरतें मुझे तोता बना सकें। दार्जिलिंग का नजदीकी रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी और नजदीकी बस स्टेशन सिलीगुड़ी है। तो न्यू जलपाईगुड़ी की ट्रेन पकड़ने के लिए हम बलिया से चल पड़े बिहार के एक रेलवे स्टेशन बक्सर के लिए।
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