युधिष्ठिर ने सिर्फ आधा झूठ बोला था– "अश्वत्थामा हतः।" "नरो वा कुंजरो" को तो श्रीकृष्ण की शंखध्वनि ने छ्पिा लिया था। इस आधे झूठ के कारण जीवन भर कभी भी मिथ्या भाषण न करने वाले युधिष्ठिर को नरक के दर्शन करने का दण्ड मिला था। खैर,यह तो बहुत बड़े धार्मिक विश्लेषण का विषय है और मेरी इतनी पहुँच नहीं है। मेरे तो इस धार्मिक चिन्तन का कारण सिर्फ यह मान्यता है कि असीरगढ़ के किले में स्थित शिव मन्दिर में आज भी अश्वत्थामा पूजा करने आते हैं। अब किसी स्थान का वर्तमान किसी रहस्यमय अतीत से जुड़ा है तो कौन ऐसे स्थान पर नहीं जाना चाहेगा।
