बिहार का जहानाबाद जिला। दिन के 10 बजे जब मैं बराबर पहुँचा तो धूप मेरे बराबर हो गयी थी। और अब मुझसे आगे निकलने की होड़ में थी। मुझे बराबर की पहाड़ियों पर इसी तपती धूप में ऊपर चढ़ना था तो मैं सामने आने वाली परिस्थिति का अनुमान भी लगा रहा था। सुबह का समय इन पहाड़ियों पर घूमने के लिए बहुत मुफीद रहा होता लेकिन मेरे लिए वह समय निकल चुका था। मैंने बराबर के चौराहे पर एक कोने में थोड़ी छाया देखकर बाइक खड़ी की और सामने वाले दुकानदार से उसकी निगरानी करने के लिए निवेदन किया।
