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Friday, October 14, 2022

विजयगढ़ किला

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मुक्खा फॉल से चलकर मुझे राबर्ट्सगंज जाना था जो कि साेनभद्र का जिला मुख्यालय है। आज की रात मुझे यहीं ठहरना भी था। लेकिन राबर्ट्सगंज जब मैं पहुँचा तो अभी दिन के लगभग 2 बज रहे थे। सूरज सिर से उतर रहा था। गर्मी और ठण्ड तभी तक लगती है जब तक उसे महसूस किया जाय। मुझे तो बस बुन्देलखण्ड की हरियाली ही महसूस हो रही थी। वो कहावत है न कि सावन के अन्धे को बस हरा ही सूझता है। दिन के 2 बजे या 12,सूरज सिर पर चढ़े या उतरे,गर्मी महसूस होने का सवाल ही नहीं था।

Friday, October 7, 2022

मिर्जापुर के झरने

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इस पोस्ट का शीर्षक मैंने वैसे तो मीरजापुर के नाम पर रखा है लेकिन इसमें सोनभद्र जिले का भी कुछ विवरण शामिल है। अब कुछ वर्षों पहले दोनों एक ही तो थे जब 4 मार्च 1989 को दोनों को अलग कर दिया गया। मीरजापुर का इतिहास और भूगोल दोनों बहुत ही रोचक है। यहाँ चुनार और विजयगढ़ जैसे ऐतिहासिक किले अवस्थित हैं तो छोटी–छोटी बरसाती नदियों पर पाये जाने वाले झरने इसे प्राकृतिक दृष्टि से अत्यन्त खूबसूरत बनाते हैं। यदि इस भूभाग के इतिहास और भूगोल की विस्तृत चर्चा की जाय तो कई किताबें तैयार हो जायेंगी। चूँकि मेरा विषय केवल मेरी एक छोटी सी यात्रा है तो फिर आगे बढ़ते हैं।

Friday, September 30, 2022

लखनिया दरी से विन्ध्याचल

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राजदरी और देवदरी से जब मैं निकला तो सूरज लगभग सिर पर आ चुका था। और सिर पर कोई भी सवार हो तो अच्छा नहीं लगता। तिस पर भी अगस्त के महीने का चमचमाता सूरज। आसमान में ʺकाले मेघाʺ तो क्या श्वेत मेघा भी मेरे आने के डर से अन्तर्ध्यान हो चुके थे। कुल मिलाकर तेज धूप और तीखी ऊमस। फिर भी मुझे तो चलना था। मेरा अगला लक्ष्‍य था लखनिया दरी। वापस उसी रास्ते से बिल्कुल उत्तर की ओर चन्द्रप्रभा डैम से चकिया के पास (15 किलोमीटर)। यह सीधी सड़क मु्गलसराय की ओर चली जाती है लेकिन चकिया से कुछ पहले मैं एक पतली सड़क पर पश्चिम की ओर मुड़ गया और अहरौरा नामक स्थान तक (19 किलोमीटर) चलता रहा।

Friday, September 23, 2022

राजदरी–देवदरी

घर का जोगी जोगड़ा,आन गाँव का सिद्ध। या फिर घर की मुर्गी साग बराबर। कई मामलों में यह कहावतें बिल्कुल फिट बैठती हैं। हम यूपी वालों को लगता है कि अपने यहाँ घूमने–देखने लायक है ही क्याǃ तो पूरा हिमालय,पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत नाप आते हैं और अपना राज्य अनदेखा ही रह जाता है। मेरे साथ भी कुछ–कुछ यही कहानी जुड़ी हुई है। अपने राज्य उत्तर प्रदेश की मैंने बहुत ही कम,नाममात्र यात्राएं की हैं। इतना बड़ा राज्य और देखा कुछ नहीं। थोड़ी सी कोफ्त तो होगी ही। तो इसी कोफ्त को दूर करने के उद्देश्य से,इस बार की छोटी सी यात्रा के लिए मैंने मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों को चुना और समय अगस्त का महीना। पहाड़ दिखेंगे जो मानसून की बारिश में हरे–भरे हो गये होंगे।

Friday, May 4, 2018

कालिंजर

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आज खजुराहो में मेरा तीसरा दिन था। वैसे तो खजुराहो आने वाले पर्यटक एक या दो दिन यहाँ ठहरने के बाद यहीं से वापस लौट जाते हैं अर्थात खजुराहो आने का मतलब यहाँ मंदिरों की दीवारों पर बनी बहुचर्चित मूर्तियों का दर्शन और फिर जल्दी से खजुराहो से पलायन,लेकिन मेरा कार्यक्रम कुछ और ही था। खजुराहो आने का मतलब ही क्या जब तक कि चंदेलों के इतिहास को अच्छी तरह से न खंगालें। चूँकि कालिंजर अतीत में चंदेलों की राजधानी रहा है और एक ऐसा भी दौर गुजरा जबकि कालिंजर का किला सत्ता का केन्द्र रहा। तो बिना कालिंजर की यात्रा किये खजुराहो यात्रा अधूरी रहती।

Friday, January 5, 2018

झाँसी–बुन्देले हरबोलों से सुनी कहानी

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दिन के 1.45 बज रहे थे। अब मेरी ओरछा गाथा समाप्त होने को थी। मैं किसी स्वप्नलोक से बाहर निकल रहा था। यात्रा वास्तविकता में ही हो सकती है,सपने में नहीं। अब मैं बुन्देले हरबोलों से कहानी सुनने झाँसी जा रहा था। होटल से बैग लेकर बाहर निकला तो बिना मेहनत के झाँसी के लिए ऑटो मिल गयी। आधे घण्टे में ही झाँसी बस स्टेशन पहुँच गया। पहले रात में रूकने की व्यवस्था करनी थी क्योंकि बैग भी वहीं सुरक्षित रहेगा। इसे हाथ में टाँगकर कहाँ मारा–मारा फिरूंगा। वैसे तो ओरछा में भी रूककर झाँसी घूमा जा सकता है लेकिन थोड़ा झाँसी के बारे में जानने के लिए यहाँ भी रूकना जरूरी है।

Friday, December 22, 2017

देवगढ़–स्वर्णयुग का अवशेष

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चौथा दिन–
मेरी इस यात्रा का यह चौथा दिन था। कल शाम को चन्देरी से वापस आकर जब मैं ललितपुर में रूका तो लग नहीं रहा था कि मैं कहीं किसी दूसरे शहर में हूँ। उत्तर प्रदेश के किसी छोटे शहर जैसा,जिसे अभी अत्यधिक भीड़भाड़ और व्यस्तता ने अपनी चपेट में नहीं लिया है। जिला मुख्यालय है लेकिन रोडवेज का बस स्टेशन अभी बन रहा है। बड़ी–बड़ी ट्रेनें गुजरती हैं लेकिन रेलवे स्टेशन अभी छोटा सा ही है। बचपन में उत्तर प्रदेश का नक्शा कहीं देखता था तो मन में सवाल उठता था कि ये ललितपुर और मिर्जापुर जिले नीचे लटके हुए से क्याें हैं। चारों ओर से मध्य प्रदेश से घिरे हुआ ललितपुर की लोकेशन ऐसी है कि किसी भी तरफ निकलिए मोबाइल रोमिंग में हो जाता है। आज मैं उसी ललितपुर जिले में उपस्थित था।

Friday, April 7, 2017

रामनगर और चुनार

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कल दिन भर मैं सारनाथ में बुद्ध के उपदेश ग्रहण करता रहा। बनारस मेरे लिए बहुत पहले से ही परिचित सा रहा है। तो आज मैंने रामनगर और चुनार के किले देखने का प्लान बनाया। रामनगर तो गंगा उस पार बनारस से सटे हुए ही है लेकिन वाराणसी से चुनार की दूरी लगभग 45 किमी है। वैसे बनारस से चुनार जाने के लिए पर्याप्त विकल्प उपलब्ध हैं। वाराणसी सरकारी बस स्टैण्ड से विंध्याचल जाने वाली बसें चुनार होकर ही जाती हैं। इसके अतिरिक्त ऑटो रिक्शा भी जाते हैं लेकिन इनके दो रूट हैं। वाराणसी कैण्ट से राजघाट पुल पार कर पड़ाव के लिए ऑटाे जाती है। पड़ाव से चुनार के लिए आटो मिल जाती है।

Friday, March 31, 2017

वाराणसी दर्शन–सारनाथ


धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी वाराणसी से लगभग 9 किमी दूर उत्तर–पूर्व में स्थित सारनाथ भगवान बुद्ध के जीवन से सम्बन्धित चार प्रमुख स्थानों– कपिलवस्तु, बोधगया, सारनाथ तथा कुशीनगर में से एक है। कपिलवस्तु में उनका जन्म हुआ, बोधगया में उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ, सारनाथ में उन्होंने अपने शिष्यों को पहला उपदेश प्रदान किया जिसे धर्मचक्रप्रवर्तन कहा जाता है तथा कुशीनगर में उन्हें निर्वाण प्राप्त हुआ। तो आज मैं इसी बुद्ध नगरी सारनाथ में सशरीर उपस्थित था।
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