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Friday, September 14, 2018

आमेर से नाहरगढ़

इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें–

11.30 बज रहे थे। तेज धूप में आमेर महल की चढ़ाई–उतराई ने शरीर का पानी सोख लिया था। उस जमाने के राजे–महाराजे कैसे महल में आते–जाते होंगे,सो तो वही जाने। शायद छत्र लगाने और हवा करने के लिए भी सेवक लगे रहते थे। पर अपनी किस्मत में यह सब कहाँǃ तो फिर बाहर निकल कर पहले मिल्क शेक के ठेले पर शरीर की जलापूर्ति बहाल की और फिर बाइक लेकर जयगढ़ और नाहरगढ़ के रास्ते पर निकल पड़ा।
आमेर से वापस जयपुर की ओर लगभग 2 किमी चलने पर एक त्रिमुहानी से दाहिने एक सड़क जयगढ़ व नाहरगढ़ की ओर निकलती है।

Friday, September 7, 2018

जयपुर–गुलाबी शहर में

गुलाबी इसलिए नहीं कि वहाँ गुलाबों की खेती होती है वरन गुलाबी इसलिए कि वहाँ के दर–ओ–दीवार का रंग गुलाबी है। जी हाँ,रेगिस्तान का प्रवेश द्वार गुलाबी ही तो है। और रेगिस्तान भी कितना हरा–भराǃ आश्चर्य है। क्योंकि मुझे तो हरा–भरा ही दिखाई पड़ा। अगस्त के महीने में जयपुर के अास–पास की धरती इतनी हरी–भरी थी कि मैंने सोचा भी न था। वैसे तो जेठ की भीषण गर्मी के बाद बरसात,रेगिस्तान तो क्या,पत्थर को भी नर्मदिल बना देती है। गुलाबी नगरी इस समय हरियाली से घिरी हुई थी। तो फिर राजघरानों की शान–ओ–शौकत के साथ मौसम की नजाकतों का लुत्फ उठाने मैं जयपुर की ओर निकल पड़ा।
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