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Friday, November 9, 2018

त्र्यंबकेश्वर

इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें–

पंचवटी घूमने में 11 बज गये। सूत्रों से पता चला था कि नासिक–इगतपुरी रोड पर एक नया जैन मंदिर बना है जिसकी वास्तुकला दर्शनीय है। तो सबसे पहले ऑटो के सहारे मैं नासिक के केन्द्रीय बस स्टैण्ड पहुँचा। नासिक के केन्द्रीय बस स्टैण्ड से जैन मंदिर की दूरी तो केवल 15 किमी है लेकिन कौन सी बस जाएगी,ये पता करना भी काफी कठिन काम था। इस काम में भाषा सबसे बड़ी बाधा है। किसी ने बताया कि वडीवर्हे जाने वाली बस उधर होकर ही जाएगी। आधे घण्टे तक स्टेशन परिसर में बेवकूफों की तरह भागदौड़ करने के बाद एक बस मिली।

Friday, November 2, 2018

नासिक

सितम्बर का महीना। ऊमस भरी गर्मी। घुमक्कड़ ऐसे में चल पड़ा उस स्थान की ओर,जहाँ भगवान राम ने अपनी पर्णकुटी बनाई थी अर्थात् नासिक। सोचा था,एक दिन पर्णकुटी के बगल में किसी झोपड़ी में विश्राम करूँगा। जंगल में भगवान राम के चरण जहाँ पड़े होंगे,उन स्थानों का दर्शन करूँगा। उस गुफा में मैं भी एक दिन गुजारूँगा जहाँ राम ने माँ सीता को सुरक्षित रखा था। उस जगह को भी देखने की कोशिश करूँगा जहाँ मारीच का वध हुआ था। शायद मुझे ध्यान नहीं आया कि उस समय से अब तक कई युग बीत चुके हैं। अब तक तो वहाँ वृक्षों के जंगल की जगह कंक्रीट की इमारतों का जंगल खड़ा हो गया होगा।
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