Thursday, May 25, 2017

दार्जिलिंग–वज्रपात का शहर

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16 अप्रैल–
दार्जिलिंग–
या वज्रपात का शहर।
लघु हिमालय में स्थित इस पहाड़ी क्षेत्र को अंग्रेजों ने एक हिल स्टेशन के रूप में स्थापित किया। यह स्थान उनके लिए शारीरिक सुख के लिहाज से अनुकूल था। साथ ही सिक्किम की ओर जाने वाले मार्ग में पड़ने वाला दार्जिलिंग सामरिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण था। इसी वजह से भारत के अन्य हिल स्टेशनों की तरह ही अंग्रेजों ने इसकी खोज की और इसे विकसित किया। ब्रिटिश ढाँचे में बनी इमारतें इसकी गवाह हैं। इन इमारतों के अलावा कुछ स्थानों केे नाम भी अंग्रेजों के प्रभाव को बखूबी बयां करते हैं। दार्जिलिंग से कलिम्पोंग की यात्रा में कुछ स्थानों के नाम हमें इस तरह मिले जैसे– सिक्स्थ माइल,टेन्थ माइल,इलेवेन्थ माइल (6th mile, 10th mile, 11th mile) जिनका मतलब हम समझ नहीं सके। काफी खोजबीन करने के बाद एक ऐसा व्यक्ति मिला जिसने ये राज खोला। दरअसल उस समय ये स्थान आबादी विहीन थे लेकिन लम्बे रास्ते में सुविधाजनक पड़ावों के लिए कुछ खास चिह्न बनाना आवश्यक था। तो फिर उस समय के अंग्रेज प्रशासकों ने माइलस्टोन के नाम पर ही इन स्थानों के नाम रख दिये जो आजतक चले आ रहे हैं।

Thursday, May 18, 2017

कलिम्पोंग

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15 अप्रैल–
आज हम कलिम्पोंग जा रहे थे। जल्दी सो कर उठे और गरम पानी के लिए होटल के काउण्टर पर कई बार दौड़ लगाई फिर भी सात बजे पानी मिला। दार्जिलिंग से कलिम्पोंग की दूरी 54 किमी है और रास्ता पहाड़ी मोड़ों वाला। इसलिए हम सतर्क थे कि कहीं देर न हो जाए और हमें घूमने का समय न मिले। लगभग आठ बजे तक हम दार्जिलिंग के चौक बाजार बस स्टैण्ड पहुँच गये। टिकट बुक कराने काउण्टर पर गये तो पता लगा कि पहली गाड़ी निकल चुकी है और दूसरी गाड़ी में पीछे वाली सीट ही खाली है। अगली गाड़ी निकलने में लगभग 45 मिनट का समय लग सकता है। इसलिए पीछे वाली सीट से ही सन्तोष कर लिया। दार्जिलिंग से कलिम्पोंग का शेयर्ड गाड़ी का किराया 130 रूपये है। 8.15 तक हमारी गाड़ी कलिम्पोंग के लिए रवाना हो गयी। गाड़ी में कुल 10 लोगों में हमारी श्रेणी के या़त्री हम दो लाेग ही थे। हमारी श्रेणी का मतलब कलिम्पाेंग जाने और वहाँ घूमकर वापस आने वाले। अधिकांश तो वहाँ जाकर रूकने वाले ही थे और एक–दो लौटने वाले थे तो किसी खास प्रयोजन से कलिम्पोंग जा रहे थे। घूमने वाले हम ही थे।

Friday, May 12, 2017

दार्जिलिंग हिमालयन रेल का सफर

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brajeshgovind.in
14 अप्रैल
आज हम दार्जिलिंग हिमालयन रेल या ट्वाय ट्रेन का सफर करने वाले थे जिसके लिए हमने लगभग 15 दिन पूर्व ही टिकट बुक कर रखा था। चूँकि हमारी ट्रेन का टाइम 9.40 पर था अतः उसके पहले हमने दार्जिलिंग के कुछ लोकल साइटसीन का प्लान बनाया जिसके लिए हमने कल बुकिंग की थी। इसके अनुसार आज सुबह का प्लान था– 3 प्वाइंट टूर। इसमें सम्मिलित था टाइगर हिल पर सूर्योदय,बतासिया लूप तथा घूम मोनेस्ट्री। टाइगर हिल पर सूर्योदय देखने के लिए आवश्यक था कि वहाँ लगभग 5 बजे तक पहुँच जाया जाय। इसलिए सुबह उठने का टाइम 4 बजे का निर्धारित था। इसके पहले ही होटल के एक लड़के ने सभी जाने वाले पयर्टकों का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया। हम भी नित्यक्रिया से निवृत्त हुए और 4.30 बजे तक हम गाड़ी के अन्दर थे। शेयर्ड गाड़ी में बीच वाली सीट में हम पहले से आकर बैठ गये थे इस डर से कि कहीं पीछे न बैठना पड़ जाय।

Saturday, May 6, 2017

मिरिक–प्रकृति की गोद में

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13 अप्रैल–
कल शाम तक हम दार्जिलिंग पहुँच चुके थे और दार्जिलिंग से साक्षात्कार हो चुका था। थके थे इसलिए जल्दी सो गये। दार्जिलिंग की सड़कों पर घूमने का प्लान तैयार नहीं हो पाया। इसलिए आज सीधे दार्जिलिंग से बाहर मिरिक की ओर निकल पड़े। मिरिक घूमने के लिए किसी विशेष प्लानिंग की जरूरत नहीं है। मिरिक जाने के लिए चौक बाजार बस स्टैण्ड जाना पड़ता है। या यूँ कहें कि चौक बाजार बस स्टैण्ड ही दार्जिलिंग से बाहर निकलने के लिए मुख्य द्वार है। यहां से लगभग सभी स्थानों के लिए छोटी बसें या शेयर्ड टाटा सूमो या इसी तरह की अन्य गाड़ियाँ उपलब्ध हैं। दार्जिलिंग रेलवे स्टेशन से चौक बाजार बस स्टैण्ड की दूरी लगभग 1 किमी है। रास्ता अगर मालूम नहीं है तो पूछते–पूछते यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। लगभग सीधा रास्ता है। सुबह के 7 बजे से ही यहां से गाड़ियाँ मिलनी शुरू हो जाती हैं। सीटों की बुकिंग के लिए छोटे–छोटे काउण्टर बने हुए हैं। काउण्टर से एडवान्स में टिकट बुक करा सकते हैं या फिर सड़क पर जा रही कोई गाड़ी जिस पर मिरिक की नेम प्लेट लगी हो,को हाथ के इशारे से रोककर सीधे भी उसमें सवार हो सकते हैं। जैसी आपकी मर्जी। दार्जिलिंग से मिरिक तक का शेयर्ड गाड़ी का किराया 100 रूपये है। इसमें कोई मोल–भाव नहीं। जो पहले से पूरी तरह से निर्धारित है तो है। अपनी निजी गाड़ी बुक करने का किराया लगभग 1500 रूपये के आस–पास है।

Monday, May 1, 2017

न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग की ओर

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12 अप्रैल
दोपहर के 12.25 बजे ट्रेन से उतरने के बाद न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन से बाहर निकलकर हमने दार्जिलिंग जाने के विकल्पों के बारे में पता किया। रिजर्व टैक्सी का किराया 2500 सुना तो पांव तले की जमीन खिसक गई। न्यू जलपाईगुड़ी से सिलीगुड़ी की दूरी लगभग 5 किमी है। इस दूरी को यदि 20 रूपये प्रति व्यक्ति के हिसाब शेयर्ड आटो से तय कर लिया जाय तो फिर सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग के लिए शेयर्ड टाटा सूमो गाड़ी आसानी से मिल जायेगी। लेकिन इस बात की जानकारी हमें नहीं थी। अभी हम इधर–उधर की सोच ही रहे थे कि एक मानवचालित रिक्शेवाले ने हमें कैप्चर कर लिया। उसने बताया कि मैं 50 रूपये में सिलीगुड़ी बस स्टैण्ड पहुंचा दूंगा और वहां से आपको बस मिल जायेगी। हमने सोचा ठीक ही है। अच्छे से मोल भाव किया और रिक्शे पर सवार होकर चल दिये। लेकिन न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही रिक्शे वाला प्राइवेट ट्रैवेल एजेन्सी वालों के सामने जा खड़ा हुआ और ट्रैवेल एजेन्सी वाले पीछे पड़ गये। हमने पूछा– "अरे भाई यहां कहां रोक दिएǃ"
रिक्शेवाले ने कहा– "यहां भी देख लीजिए फिर चलते हैं।"