Friday, August 19, 2016

श्रीनगर

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21 जून 2014 को सुबह 8.30 बजे हमारी मिनी बस श्रीनगर के लिए रवाना हुई। हमलोगों की संख्या जो कि 18 थी, के हिसाब से यह थोड़ी छोटी थी क्योंकि इसमें 17 यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह थी। इस वजह से इसमें एडजस्ट करने में कुछ दिक्कतें आने लगीं। कटरा से यह उसी सड़क से होकर निकली जिधर हम ठहरे थे। कटरा से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 1A को पकड़ने के लिए लगभग 15 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। यह राजमार्ग जालन्धर (राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 1) से आरम्भ होकर पठानकोट,कठुआ, जम्मू, उधमपुर, कुड, बटोट, रामबन, अनन्तनाग, अवन्तीपुरा, श्रीनगर, बारामूला होते हुए उड़ी तक जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर 157 किमी की दूरी पर रामबन पड़ता है। रामबन के पहले सड़क चेनाब नदी को पार करती है। बटोट में दायें से राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 1B निकलता है जो डोडा, किश्तवार हुए अनन्तनाग में पुनः 1A से मिल जाता है।

बटोट के कुछ दूर बाद से ही चिनाब सड़क के पास आ जाती है और रामबन के कुछ और आगे तक साथ साथ चलती है। पूरा रास्ता पहाड़ी है और बहुत ही सुन्दर है। बटोट के आगे और चन्द्रकोेटि के पहले पीराह नामक स्थान पर बगलीहार पावर प्रोजेक्ट स्थित है। बटोट से पहले और कुड के बाद पटनीटाप हिल स्टेशन स्थित है जहां देवदार के पेड़ों से ढका हुआ पहाड़ी क्षेत्र है। दूर–दूर तक देखने पर हरे–भरे पार्क जैसा सुन्दर दृश्य दिखायी दे रहे थे। हमारा काफिला यहां रूका और एक घण्टे तक भ्रमण किया।

वैसे यहां घूमने के लिए कम से कम एक दिन का समय चाहिए। हम कुछ देर रूकना तो चाह रहे थे लेकिन हमारी मंजिल दूर थी और तभी अचानक हल्की सी बारिश भी आ गई अतः हम जल्दी से अपनी भेड़–बकरियां लेकर बस के अन्दर भागे।
पुनः आगे चल पड़े। बस में बैठे–बैठे उबन तो हो रही थी लेकिन पहाड़ी रास्ते की सुन्दरता सारी थकान हर ले रही थी। कभी कभी तो तीखे मोड़ पर ड्राइवर का दुस्साहस देखकर यात्रियों की सांसें अटक जा रही थीं। रामबन से आगे चलकर बनिहाल के आस पास पहुंचे जहां एक छोटी सी मड़ई वाली दुकान में चाय पी गयी। यहां सड़क के बगल में बनिहाल की संकरी पहाड़ियों के बीच बहती एक छोटी सी नदी का दृश्य बहुत ही मनोहारी था। ऊंचे ऊंचे पहाड़ और बीच की संकरी सी घाटी में बहती, कल–कल करती स्वच्छ जल वाली एक नदी। मन हरा–भरा हो गया। लगा कि कश्मीर आ गये। कुछ और आगे जाकर बस ने जवाहर सुरंग को पार किया । इसके बाद खानबल, बिजबिहारा, अवन्तिपुरा, पम्पोर होते हुए हम श्रीनगर पहुंच गये।
श्रीनगर चूंकि एक समतल घाटी में बसा है अतः जो पहाड़ी दृश्य हमें आकर्षित कर रहा था वह समाप्त हो गया। बिजबिहारा में रूककर हमने एक पंजाबी ढाबे में चाय–पानी किया। रात में 11–11.30 के आस–पास हम अपने होटल पहुंचे। होटल में 18 लोगों के लिए छः कमरे लिए गये थे। होटल की व्यवस्था बहुत अच्छी थी। कमरे में टीवी, बाथरूम में गीजर वगैरह था।
कमरे से निकल कर कहीं भी बाहर सड़क पर पैदल टहलते समय या बस से जाते समय सड़क किनारे बने सुरक्षाबलों के बंकर देखकर लग रहा था कि हम किसी दूसरे ही देश में आ गये हैं। म
22 जून को हमारा कार्यक्रम श्रीनगर के आसपास के भ्रमण का था। उसी मिनी बस से हम सुबह 9 बजे घूमने निकले। सबसे पहले डल झील। डल झील की लम्बाई 6 किमी तथा चौड़ाई 3 किमी है। झील में कुछ द्वीप भी हैं। डल झील में हम तीन मित्रों ने बड़े ही मोलभाव के बाद 450 रूपये में एक शिकारा ऊर्फ नाव को किराये पर लिया और सुन्दर दृश्यों का आनन्द लिया। वैसे तो नाव की सवारी किसी दूसरी झील या नदी में भी की जा सकती है पर इतनी ऊंचाई पर और पहाड़ों के बीच में नाव की सवारी का मजा ही कुछ और है।चारों तरफ देखने पर दूर–दूर तक पहाड़ दिखायी दे रहे थे। डल झील और इसके आस पास के क्षेत्र की एक और भी विशेषता मनमोहक लगी, वह यह कि इसमें बाजार से लेकर दैनिक जीवन तक सब नाव पर आधारित है। झील में ही होटलों के रूप में हाउसबोट हैं जिनका एक दिन का किराया पूछने पर पता चला कि 4 हजार से भी ऊपर है। किराया जान कर लगा कि न ही पूछना बेहतर है क्योंकि अपुन तो एक दिन के होटल के लिए इतना खर्च करने से रहे।
डल झील के बाद हमारे ट्रैवल एजेन्ट के हिसाब से घूमने के प्वाइंट तो कई थे लेकिन हमने केवल बोटेनिकल गार्डेन, निशात बाग तथा शालीमार बाग को चुना क्योंकि कई प्वाइंट चुन लेने पर हम कहीं भी समय नहीं दे पाते और केवल यात्री बन कर रह जाते। बोटेनिकल गार्डेन बहुत ही सुन्दर बना है। देवदार और चीड़ के पेड़ों के अलावा सजावटी पौधे भी लगाये गये हैं। शालीमार बाग मुगल बादशाह जहांगीर ने अपनी बेगम नूरजहां के लिए बनवाया था। निशात बाग कश्मीर का सबसे बड़ा मुुगल बागीचा हैै। निशात बाग के फव्वारे बहुत ही मनमोहक हैं। इन सभी जगहों पर घूमने के लिए कम से कम एक–एक दिन का समय चाहिए जहां पिकनिक की तरह से समय बिताया जा सके। सभी जगह हमने पैदल भ्रमण किया और फोटोग्राफी की।
दिन भर घूमने के बाद हम शाम को होटल पहुंचे और अगले दिन गुलमर्ग घूमने का प्लान बनाया गया।




जम्मू से श्रीनगर के रास्ते में सड़क का नागिन डान्स

ऊंचाई से सड़क का दृश्य

पटनीटाप में देवदार के जंगल

पटनीटाप में अपने काफिले के साथ


पटनीटाप से आगे रास्ते में एक छोटे से कस्बे का विहंगम दृश्य





बगलीहार जलविद्युत परियोजना के पास



बगलीहार बांध

बनिहाल दर्रे के पहले

सड़क से नीचे नदी के किनारे



डल झील में शिकारे पर




डल झील में



डल झील का मनमोहक दृश्य






मेरे सहयात्री राणा भाई,मेरे फोटो खींचने का जिम्मा इन्हीं के पास था


झील में बतखों का जोड़ा









बोटेनिकल गार्डेन में


बोटेनिकल गार्डेन में

बोटेनिकल गार्डेन में देवदार का पेड़




निशात बाग में

निशात बाग में


निशात बाग में मित्रों के साथ

निशात बाग में मैगनोलिया का फूल


निशात बाग में मैगनोलिया का फूल



निशात बाग से दूर का दृश्य


14–15 जून के आस–पास श्रीनगर में धान की खेती


शालीमार बाग में 

शालीमार बाग से दूर की चोटियों का दृश्य

शालीमार बाग

शालीमार बाग

शालीमार बाग

अगला भागः गुलमर्ग

सम्बन्धित यात्रा विवरण–


श्रीनगर शहर का गूगल फोटो–

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