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Friday, February 21, 2020

भारत का अपवाह तंत्र-1

 
किसी भू–भाग का जल–प्रवाह,उस भू–भाग की वर्षा की प्रकृति एवं मात्रा,उच्चावच्च के स्वरूप एवं व्यवस्था का परिचायक होता है। जल–प्रवाह के वैसे तो कई स्रोत हो सकते हैं लेकिन नदियाँ जल–प्रवाह का प्रमुख स्रोत होती हैं। नदियों का जल प्रवाह न केवल सम्बन्धित क्षेत्र के प्राकृतिक स्वरूप को गढ़ता है वरन मानव के जीवन यापन एवं उसके क्षेत्रीय प्रतिरूप को भी प्रभावित करता है। नदियों का बहता हुआ जल सम्पूर्ण विश्व में प्रारम्भिक प्राकृतिक स्वरूप को परिवर्तित करने का सबसे बड़ा कारक है। अपने अपरदन,परिवहन और निक्षेपण सम्बन्धी कार्याें के द्वारा नदियाँ विभिन्न स्थलरूपों का निर्माण करती हैं। जीव जगत को अपने जल के द्वारा जीवन प्रदान करती हैं और साथ ही मैदानों का निर्माण कर मनुष्य के आवास और कृषि के लिए साधन भी प्रदान करती हैं।
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