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मुक्खा फॉल से चलकर मुझे राबर्ट्सगंज जाना था जो कि साेनभद्र का जिला मुख्यालय है। आज की रात मुझे यहीं ठहरना भी था। लेकिन राबर्ट्सगंज जब मैं पहुँचा तो अभी दिन के लगभग 2 बज रहे थे। सूरज सिर से उतर रहा था। गर्मी और ठण्ड तभी तक लगती है जब तक उसे महसूस किया जाय। मुझे तो बस बुन्देलखण्ड की हरियाली ही महसूस हो रही थी। वो कहावत है न कि सावन के अन्धे को बस हरा ही सूझता है। दिन के 2 बजे या 12,सूरज सिर पर चढ़े या उतरे,गर्मी महसूस होने का सवाल ही नहीं था।

