Friday, September 30, 2022

लखनिया दरी से विन्ध्याचल

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राजदरी और देवदरी से जब मैं निकला तो सूरज लगभग सिर पर आ चुका था। और सिर पर कोई भी सवार हो तो अच्छा नहीं लगता। तिस पर भी अगस्त के महीने का चमचमाता सूरज। आसमान में ʺकाले मेघाʺ तो क्या श्वेत मेघा भी मेरे आने के डर से अन्तर्ध्यान हो चुके थे। कुल मिलाकर तेज धूप और तीखी ऊमस। फिर भी मुझे तो चलना था। मेरा अगला लक्ष्‍य था लखनिया दरी। वापस उसी रास्ते से बिल्कुल उत्तर की ओर चन्द्रप्रभा डैम से चकिया के पास (15 किलोमीटर)। यह सीधी सड़क मु्गलसराय की ओर चली जाती है लेकिन चकिया से कुछ पहले मैं एक पतली सड़क पर पश्चिम की ओर मुड़ गया और अहरौरा नामक स्थान तक (19 किलोमीटर) चलता रहा।

Friday, September 23, 2022

राजदरी–देवदरी

घर का जोगी जोगड़ा,आन गाँव का सिद्ध। या फिर घर की मुर्गी साग बराबर। कई मामलों में यह कहावतें बिल्कुल फिट बैठती हैं। हम यूपी वालों को लगता है कि अपने यहाँ घूमने–देखने लायक है ही क्याǃ तो पूरा हिमालय,पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत नाप आते हैं और अपना राज्य अनदेखा ही रह जाता है। मेरे साथ भी कुछ–कुछ यही कहानी जुड़ी हुई है। अपने राज्य उत्तर प्रदेश की मैंने बहुत ही कम,नाममात्र यात्राएं की हैं। इतना बड़ा राज्य और देखा कुछ नहीं। थोड़ी सी कोफ्त तो होगी ही। तो इसी कोफ्त को दूर करने के उद्देश्य से,इस बार की छोटी सी यात्रा के लिए मैंने मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों को चुना और समय अगस्त का महीना। पहाड़ दिखेंगे जो मानसून की बारिश में हरे–भरे हो गये होंगे।
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