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Friday, January 14, 2022
Friday, December 31, 2021
Friday, November 26, 2021
Friday, October 8, 2021
Friday, May 10, 2019
महाबलिपुरम
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दोपहर के 12 बजे हम कन्याकुमारी के लिए रवाना हो गये। कन्याकुमारी से महाबलिपुरम की दूरी 663 किमी है। गूगल मैप पर जब दूरी चेक की गयी तो इतना तो समझ में आ ही गया कि आज भी रात भर बस में यात्रा ही करनी पड़ेगी। आराम करने का मौका तो बस चाय पीने के दौरान ही आएगा। अन्यथा बस में पैर लटकाए–लटकाए सूजन तो होनी ही है। तो हम रास्ते भर,हर ढाई–तीन घण्टे पर चाय या काॅफी पीते रहे। शाम तक ड्राइवर ने जब हमारा यह रवैया देखा तो एक ढाबे पर गाड़ी रोककर खाना खा लिया। और उसके बाद गाड़ी चलती रही।
Friday, May 3, 2019
कन्याकुमारी
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रामेश्वरम से कन्याकुमारी के लिए दिन के 11.30 बजे रवाना हुए तो भरपेट खाना खाकर। लगभग 310 किलोमीटर की दूरी तय करनी थी। तो अब अगला भोजन रात में कन्याकुमारी में नियत था। सारी चिन्ताएं कपूर के धुएं की माफिक उड़ गयी थीं। चाय–काफी तो बिन माँगे मिलते रहेंगे। अधिकांश दूरी समंदर के किनारे–किनारे ही तय करनी थी। हम नारियल के देश में थे। नारियल के झुण्ड के झुण्ड पेड़ों को देखकर मन गदगद हुआ जा रहा था। शाम के 5.30 बजे कन्याकुमारी पहुँच गये। तमिलनाडु का जिला कन्याकुमारी। शहर कन्याकुमारी। सागरों के संगम वाला शहर कन्याकुमारी।
Friday, April 26, 2019
रामेश्वरम
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सुबह के 10 बजे मदुरई से चलने के बाद हम चलते ही रहे। 2 बजे तक हम 165 किमी की दूरी तय कर भारत की मुख्य भूमि को छोड़कर,पंबन ब्रिज पर पहुँच चुके थे। चारों तरफ पानी ही पानी देखकर गाड़ी रोकी गयी। समु्द्र को हनुमान की तरह लांघता पुल रोमांच पैदा कर रहा था। वैसे पुल से गुजरते हुए यह कतई महसूस नहीं हो रहा था कि हम समुद्र के ऊपर से गुजर रहे हैं। खट्टे–मीठे अनन्नास की फांके खाते हुए इस पुल पर टहलना और फोटो खींचना कितना आनन्ददायक है,यह यहाँ पहुॅंच कर ही जाना जा सकता है। गाड़ी का ड्राइवर लाख शोर मचाये,हम तो अपनी वाली ही करेंगे।
Friday, April 19, 2019
मदुरई
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वेल्लोर से शाम के 7.30 बजे हम मदुरई के लिए रवाना हो गये। अब रात भर चलना था। सोच कर ही चक्कर आ रहे थे। ड्राइवर भी जुनूनी था। चल पड़े तो चल पड़े। सुबह के समय ही तिरूमला से सीधे मदुरई के लिए निकल लिए होते तो शाम तक या 8-9 बजे तक मदुरई में होते। दिनभर बस की खिड़की से तमिलनाडु का जनजीवन देखने को मिला होता और रात मदुरई के किसी होटल में बीतती। लेकिन ऐसा होना किस्मत में नहीं था। प्लान ड्राइवर का था। छोटी सी ट्रैवलर गाड़ी। पैर फैलाने की भी जगह नहीं थी तो पैरों को सूजन झेलनी ही थी।
Friday, April 12, 2019
तिरूमला टु मदुरई
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3
आज यात्रा का तीसरा दिन था। कल शाम के समय जब हम भगवान वेंकटेश के दर्शन कर कमरे लौटे तो एक और घटना हुई। और वो ये कि आगे की ʺयात्राʺ करने वाले ʺयात्रियोंʺ के लिए "ट्रैवलर" गाड़ी की बुकिंग की गयी। तिरूमला के सीमित दायरे में ट्रैवेल एजेंट भी संभवतः सीमित ही हैं। हमारे सामने तिरूपति पहुँचकर भी गाड़ी बुक करने का विकल्प था लेकिन हमें यहीं से बेहतर लगा सो कर लिया।
आज यात्रा का तीसरा दिन था। कल शाम के समय जब हम भगवान वेंकटेश के दर्शन कर कमरे लौटे तो एक और घटना हुई। और वो ये कि आगे की ʺयात्राʺ करने वाले ʺयात्रियोंʺ के लिए "ट्रैवलर" गाड़ी की बुकिंग की गयी। तिरूमला के सीमित दायरे में ट्रैवेल एजेंट भी संभवतः सीमित ही हैं। हमारे सामने तिरूपति पहुँचकर भी गाड़ी बुक करने का विकल्प था लेकिन हमें यहीं से बेहतर लगा सो कर लिया।
Friday, March 22, 2019
जब मैं उड़ चला
1
घूमने की चाहत तो बचपन से ही खून में समायी हुई है लेकिन हवा में परवाज़ की ख़्वाहिश भी मन में कहीं न कहीं जरूर दबी हुई थी। सो मौका पाते ही किसी आज़ाद परिंदे की भाँति,एक दिन पंख फड़फड़ाते हुए खुले आसमान में निकल पड़ा। मौका था फरवरी के महीने में दक्षिण भारत के कुछ प्रसिद्ध स्थानों की यात्रा का। प्लानिंग तो बहुत पहले ही हो चुकी थी क्योंकि कुछ मित्रों ने काफी दबाव बना रखा था। तय हुआ था कि तिरूमला के बालाजी के दर्शन किये जाएंगे। दूरी काफी बैठ रही थी। जाँच पड़ताल की गयी तो पता चला कि कम से कम चार दिन तो केवल ट्रेन को ही समर्पित करने पड़ेंगे।
घूमने की चाहत तो बचपन से ही खून में समायी हुई है लेकिन हवा में परवाज़ की ख़्वाहिश भी मन में कहीं न कहीं जरूर दबी हुई थी। सो मौका पाते ही किसी आज़ाद परिंदे की भाँति,एक दिन पंख फड़फड़ाते हुए खुले आसमान में निकल पड़ा। मौका था फरवरी के महीने में दक्षिण भारत के कुछ प्रसिद्ध स्थानों की यात्रा का। प्लानिंग तो बहुत पहले ही हो चुकी थी क्योंकि कुछ मित्रों ने काफी दबाव बना रखा था। तय हुआ था कि तिरूमला के बालाजी के दर्शन किये जाएंगे। दूरी काफी बैठ रही थी। जाँच पड़ताल की गयी तो पता चला कि कम से कम चार दिन तो केवल ट्रेन को ही समर्पित करने पड़ेंगे।
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