Friday, January 27, 2017

गंगा आरती

वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर 5 जनवरी 2017 को रिकार्ड किया गंगा आरती का एक वीडियो–


Friday, January 20, 2017

वाराणसी दर्शन–गंगा के घाट और गंगा आरती

इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें–


गोदौलिया बनारस का सबसे पुराना बाजार है। इसलिए भीड़ तो होगी ही। चौराहे पर लगा बोर्ड बता रहा था– "काशी विश्वनाथ मन्दिर 500 मीटर और दशाश्वमेध घाट 700 मीटर।" चौराहे से पैदल ही जाना है और यही उचित है क्योंकि बाजार और संकरी सड़कों की वजह से गाड़ियां ले जाना काफी समस्या पैदा करने वाला है। फिर भी स्थानीय लोग कहां मानने वाले हैं। रिक्शाें और माेटरसाइकिलों की भीड़ तो थी ही और पैदल की तो पूछना ही क्या।

Friday, January 13, 2017

वाराणसी दर्शन–नया विश्वनाथ मन्दिर

भोले बाबा की नगरी–
वाराणसी
मां गंगा का नगर,भगवान बुद्ध का नगर,फक्कड़ों का नगर,पंडो–पुजारियों का नगर,मन्दिरों का नगर,घाटों का नगर,गलियों का नगर,अखाड़ों का नगर,सन्तों का नगर,औघड़ों का नगर ............
और भी पता नहीं कितने विशेषण जुड़े हैं इस शहर के साथ।
लेकिन वाराणसी या बनारस अपनी ऐतिहासिकता के लिए प्रसिद्ध है। इसकी जड़ें इतिहास में हैं जिन्हें खोजते हुए तमाम विदेशी और हम भारतीय भी इसकी ओर खिंचे चले आते हैं।

Friday, December 9, 2016

नैनीताल और आस–पास

इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें–

11 अक्टूबर को हम नैनीताल के आस–पास के पर्यटन–स्थलों तक पहुंचने की सोच रहे थे। कई विकल्प हमारे सामने थे– एक तो था भुवाली–रानीखेत–अल्मोड़ा,दूसरा था जिम कार्बेट तथा तीसरा था– लेक टूर यानी सातताल–भीमताल–नौकुचियाताल। समय अभी हमारे पास तीन दिन था क्योंकि हमारी वापसी 13 तारीख को थी। इसमें से एक दिन अभी हम नैनी झील के लिए रखना चाह रहे थे और आस–पास थोड़ा और घूमना चाह रहे थे और जिम कार्बेट में 1 जून से 14 नवम्बर तक मानसून की वजह से प्रवेश नहीं होता,लेकिन इस बात की जानकारी हमें उस समय नहीं थी।

Friday, December 2, 2016

सातताल

इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें–


12 अक्टूबर को हम झीलों की यात्रा पर निकल रहे थे। झीलों की यात्रा यानी नैनीताल के आस–पास स्थित झीलों का दर्शन। हमने एक छोटी गाड़ी 1500 रूपये किराये पर ले ली और निकल पड़े। किराये की बाइक भी मिल रही थी लेकिन सब कुछ जोड़–घटा कर वह महँगी पड़ रही थी। तो सबसे पहले नैनीताल से लगभग 22 किमी दूर स्थित सातताल। कहते हैं कि सातताल सात छोटी–बड़ी झीलों का समूह है लेकिन यहां के ड्राइवर⁄ट्रैवल एजेण्ट या तो इसकी जानकारी नहीं देते या खुद नहीं जानते। एक और बात भी है और वो यह कि एक बड़ी झील के आस–पास एक–दो छोटी झीलें भी हैं जिनके बारे हर कोई नहीं जानता। बाहर से आने वाले पर्यटक के लिए ऐसी जगहों पर पहुंच पाना असंभव नहीं तो काफी मुश्किल है।

Friday, November 25, 2016

नैनीताल भ्रमण

इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें–

9 अक्टूबर को यानी नैनीताल पहुंचने के अगले दिन हमने स्नो व्यू प्वाइंट तक पैदल चलने का निश्चय किया और चल दिये। बिल्कुल सही रास्ता पता नहीं था अतः पूछते हुए चल दिये। एक दिन पहले टैक्सी से भी हम यहां पहुंच चुके थे लेकिन इन पहाड़ी घुमावदार रास्तों पर टैक्सीवाला किधर से वहां पहुंचा,समझ में नहीं आया था। वैसे बहुत ज्यादा पूछने की आवश्यकता भी नहीं थी। माल रोड पर ही चिड़ियाघर जाने के लिए छोटी गाड़ियों का स्टैण्ड है और वहीं से ऊपर चढ़ाई करते हुए एक सड़क गई है जिस पर कुछ दूर आगे जाने पर स्नो व्यू प्वाइंट जाने वाला रास्ता बायें कट जाता है और दाहिने का रास्ता चिड़ियाघर चला जाता है। सुबह के लगभग आठ बजे हम निकले और पैदल टहलते हुए 10.30 बजे तक अर्थात लगभग ढाई घंटे में ढाई किमी की दूरी तय कर ली। 

Friday, November 18, 2016

नैनीताल

सच में,नैनीताल तुम बहुत खूबसूरत होǃ
नैनीताल से वापसी के समय ट्रेन में बगल की सीट पर एक खूबसूरत नवयुगल यात्रा कर रहा था। मेरी नजर बार–बार उधर गयी तो उनकी नजरें भी मेरी तरफ आने लगीं। और जब कई बार ऐसा हुआ तो मैंने नजरें हटाना ही बेहतर समझा। अन्त में हार मानकर मैंने खिड़की से बाहर नजरें टिका लीं और मन को सांत्वना दिया–
‘सच में नैनीताल तुम बहुत खूबसूरत हो और तुम से अच्छा तो यहां कोई नहीं।‘
मेरे मन की यह भावना काफी हद तक वास्तविक होती अगर नैनीताल की वास्तविकता को वास्तविक ही रहने दिया गया होता।
सुन्दरता क्या श्रृंगार के आडम्बर में ही छ्पिी होती हैǃ

Friday, November 11, 2016

हरिद्वार और आस–पास

इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें–

28 मई की शाम को थके होने के कारण अगले दिन के लिए हम कोई प्रोग्राम तय नहीं कर पाये। अभी हमारे पास चार दिन थे क्योंकि हमारा वापसी का रिजर्वेशन 1 जून को था और घूमने के स्थान भी दिमाग में कई थे–हरिद्वार,ऋषिकेश,मंसा देवी–चण्डी देवी मंदिर,राजाजी नेशनल पार्क वगैरह–वगैरह। अगला दिन रविवार था,अतः भीड़–भाड़ वाली बात भी दिमाग में थी क्योंकि शनिवार और रविवार किसी भी पर्यटन स्थल के लिए वीकेण्ड मनाने का दिन होता है। 28 मई की शाम को हरिद्वार के एक रेस्टोरेण्ट में खाना खाने के बाद मैंने सबको वापस कमरे पर भेज दिया और स्वयं आइसक्रीम पैक कराने लगा। इसी बीच भयंकर आँधी–तूफान का दौर शुरू हुआ  जिसमें मैं घिर गया और घण्टे भर बाद ही कमरे पहुंच सका। इस आंधी–पानी का असर अगले दिन देखने को मिला। बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गयी।
Top