Friday, February 7, 2020

भारत की भूगर्भिक संरचना (3)

आर्यन कल्प की शैलें

इस समूह में ऊपरी कार्बोनिफेरस काल से लेकर प्लीस्टोसीन काल की शैलों को सम्मिलित किया जाता है। इस काल में भारत के भूगर्भिक स्वरूप में भारी उथल–पुथल हुई। भारत के उत्तर में हिमालय पर्वत श्रेणी और उत्तर के विशाल मैदान का निर्माण इसी अवधि में हुआ। इस समूह की चट्टानों को चार प्रमुख भागों में बाँटा जाता है–
1. गोण्डवाना समूह की शैलें
2. क्रीटैशियस समूह की शैलें या दकन ट्रैप्स
3. टर्शियरी समूह की शैलें
4. क्वाटर्नरी समूह की शैलें

Friday, January 31, 2020

भारत की भूगर्भिक संरचना (2)

पुराण कल्प की शैलें
धारवाड़ समूह की चट्टानों के निर्माण के पश्चात,एक लम्बे समयान्तराल के बाद इस समूह की चट्टानों का निर्माण हुआ। इस दीर्घकाल में अनेक भूगर्भिक हलचलें हुईं जिससे दो संस्तरों में ये शैलें मिलती हैं। इनमें सबसे नीचे कुडप्पा समूह और ऊपरी भागों में विंध्यन समूह की शैलें पाई जाती हैं।

(1) कुडप्पा समूह की शैलें– कुडप्पा समूह की शैलें आर्कियन और धारवाड़ शैलों के ऊपर असम्बद्ध रूप में,विभिन्न मोटाई की,अनेक समानान्तर प्राचीन अवसादी शैलों के रूप में स्थित हैं। इनका नामकरण आन्ध्र प्रदेश के कुडप्पा जिले के नाम पर हुआ है जहाँ ये एक विस्तृत अर्द्ध–चन्द्राकार क्षेत्र में फैली हुई हैं। यहाँ ये 6000 मीटर से भी अधिक मोटी हैं।

Friday, January 24, 2020

भारत की भूगर्भिक संरचना (1)

पृथ्वी पर स्थित किसी भी भाग की भूगर्भिक संरचना से हमें कई तथ्यों की जानकारी प्राप्त होती है। क्योंकि शैलों या चट्टानों की संरचना का मृदाओं और खनिज संसाधनों पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। किसी देश की कृषि और उद्योग भी शैलों की संरचना पर आधारित होते हैं। उदाहरण के लिए तलछटों के जमाव से निर्मित अवसादी शैलोें का अपरदन कर जब नदियाँ किसी मैदानी भाग का निर्माण करती हैं तो ऐसी भूमि कृषि के लिए अत्यन्त उपयोगी होती है। जबकि कठाेर प्राचीन शैलों,जिनमें जीवावशेष नहीं पाए जाते,से निर्मित मृदा कृषि के लिए अनुपयोगी होती है।

Friday, January 17, 2020

तटीय मैदान और द्वीप समूह (2)

भारत के द्वीप समूह

भारत में कुल 247 द्वीप पाए जाते हैं जिनमें से 204 बंगाल की खाड़ी और 43 अरब सागर में मिलते हैं। अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी का सर्वप्रमुख द्वीप समूह है जो विवर्तनिक या ज्वालामुखी क्रियाओं से बने हैं। इनकी समु्द्रतल से ऊॅंचाई 750 मीटर तक पाई जाती है। बंगाल की खाड़ी के द्वीप इसी प्रक्रिया से बने हैं जबकि अरब सागर के द्वीप प्रवाल या मूँगे की चट्टानों से निर्मित हैं। इन द्वीपों में से कुछ द्वीप तट के निकट पाए जाते हैं जबकि कुछ तट से काफी दूर पाए जाते हैं। तट से 1 से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित द्वीपों को निकटवर्ती द्वीप की श्रेणी में रखा जाता है जबकि 5 किलामीटर से अधिक दूरी पर स्थित द्वीपों को सुदूरवर्ती द्वीप की श्रेणी में रखा जाता है।

Friday, January 10, 2020

तटीय मैदान और द्वीप समूह (1)

भारत के प्रायद्वीपीय पठार के दोनों तरफ सँकरे मैदानी भाग पाए जाते हैं। अरब सागर की ओर स्थित मैदान को पश्चिमी तटीय मैदान तथा बंगाल की खाड़ी की ओर स्थित मैदानी भाग को पूर्वी तटीय मैदान कहा जाता है। इन मैदानों और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी में अवस्थित द्वीप समूहों का भूगोल में एक साथ अध्ययन किया जाता है। इन सभी को सम्मिलित करते हुए भारत की सम्पूर्ण तट रेखा की लम्बाई 7517 किलोमीटर है। माना जाता है कि पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट के कुछ भागों का बंगाल की खाड़ी और अरब सागर की ओर अवतलन या धँसाव हो गया जिससे घाटों के किनारे कगार की भाँति खड़े हो गए।

Friday, January 3, 2020

उत्तरी मैदानी प्रदेश (3)

ब्रह्मपुत्र का मैदान– इसे असम या ब्रह्मपुत्र घाटी  के नाम से भी जाना जाता है। यह मेघालय के पठार और हिमालय श्रेणियों के मध्य लम्बे और सँकरे मैदान के रूप में फैला हुआ है। इस मैदान के उत्तर में शिवालिक की पहाड़ियाँ,दक्षिण में गारो,खासी,जयन्तिया व मिकिर की पहाड़ियाँ और पूर्व में पटकोई और नागा पहाड़ियाँ सीमा बनाती हैं। ब्रह्मपुत्र नदी इसके लगभग बीचोबीच से होकर अत्यधिक चौड़ाई में प्रवाहित होती है। मानसून में कभी–कभी तो ब्रह्मपुत्र की चौड़ाई बढ़कर 8 किलोमीटर तक हो जाती है जिससे इसे पार करना अत्यन्त कठिन हो जाता है।

Friday, December 27, 2019

उत्तरी मैदानी प्रदेश (2)

मैदानी प्रदेश का प्रादेशिक विभाजन–
भारत का मैदानी प्रदेश एक विशाल भूभाग है। इसकी क्षेत्रीय विशेषताओं को ठीक से समझने के लिए इसे छोटे भागों में विभाजित किया जाता है। ये भाग निम्नवत हैं–
1. राजस्थान का मैदान
2. पंजाब–हरियाणा का मैदान
3. गंगा का मैदान
4. ब्रह्मपुत्र का मैदान

राजस्थान का मैदान– इसे भारतीय मरूस्थल के नाम से भी जाना जाता है।

Friday, December 20, 2019

उत्तरी मैदानी भाग (1)

उत्तरी मैदानी प्रदेश

हिमालय के दक्षिण में उसी के समानान्तर विशाल मैदानी प्रदेश फैला हुआ है। यह मैदानी प्रदेश हिमालय और दक्षिण के पठारी प्रदेश को एक दूसरे से अलग करता है। इस विशाल मैदान की उत्पत्ति हिमालय की उत्पत्ति के बाद हुई है। इस तरह भूगर्भिक दृष्टिकोण से यह नवीनतम भू–भाग है। इस मैदान का निर्माण करने वाली मुख्य नदियाँ सिन्धु,गंगा और ब्रह्मपुत्र हैं। इन मुख्य नदियों और इनकी सहायक नदियों ने एक लम्बे समयान्तराल में अवसादों का निक्षेप करके इस मैदान का निर्माण किया है और यह प्रक्रिया आज भी जारी है। प्रशासनिक दृष्टि से इस मैदान का एक बड़ा भाग पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी पाया जाता है।

Friday, December 13, 2019

प्रायद्वीपीय पठारी भाग (2)

अरावली पहाड़ियाँ– यह भारत की प्राचीनतम वास्तविक (वलित) पर्वत श्रेणी है। यह श्रेणी थार मरूस्थल की पूर्वी सीमा पर अहमदाबाद के निकट,नर्मदा नदी के तट से प्रारम्भ होकर उत्तर–पूर्व दिशा में दिल्ली के दक्षिण–पश्चिम तक,लगभग 800 किलोमीटर की लम्बाई में फैली हुई हैं। उत्तर–पूर्व की ओर इस श्रेणी की ऊँचाई और चौड़ाई क्रमशः घटती जाती है और दिल्ली के पास यह छोटे–छोटे टीलों के रूप में रह जाती है। इसकी औसत ऊँचाई 300 से 900 मीटर के बीच है। दक्षिण की ओर गुजरात में यह विदीर्ण पठार के सदृश दिखती है परन्तु उत्तर की ओर राजस्थान में यह स्पष्ट पर्वत श्रेणियों की तरह से दिखती है।

Friday, December 6, 2019

प्रायद्वीपीय पठारी भाग (1)

भारत भूमि का सर्वाधिक प्राचीन खण्ड प्रायद्वीपीय पठारी भाग है जो लगभग 16 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इस तरह यह पठारी भाग भारत के कुल क्षेत्रफल के लगभग आधे भाग में दक्षिणी–पूर्वी राजस्थान,मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,झारखण्ड,ओडिशा,महाराष्ट्र,गुजरात,कर्नाटक,आन्ध्र प्रदेश,तेलंगाना,केरल,तमिलनाडु इत्यादि राज्यों में विस्तृत है। भारत के प्रायद्वीपीय क्षेत्र के समरूप यह पठारी भाग भी त्रिभुजाकार रूप में फैला है जिसका शीर्ष दक्षिण की ओर और आधार उत्तर की ओर है। प्राकृतिक दृष्टि से इसकी उत्तरी सीमा पर अरावली,कैमूर और राजमहल की पहाड़ियाँ स्थित हैं।
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